एसजी ग्रैंड में पुरानी एओए की विदाई, लंबी खींचतान के बाद भूपेंद्रनाथ झा की टीम ने मारी बाजी, 10 में से नौ प्रत्याशी जीते

टीम आशाएँ के विजयी प्रत्याशी
विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। एसजी ग्रैंड सोसायटी में एओए चुनाव को लेकर महीनों से चल रही खींचतान का रविवार को रेजिडेंट्स ने अपने वोट से हिसाब कर दिया। जनवरी में पिछली एओए का कार्यकाल खत्म होने के बाद से चुनाव कराने को लेकर जारी रस्साकशी, बार-बार बदलते चुनाव अधिकारी और चुनावी खर्च को लेकर विवाद के बीच आखिरकार 27 सितंबर को मतदान हुआ। नतीजे आए तो भूपेंद्रनाथ झा के नेतृत्व वाली आशाएं टीम ने ऐसा दबदबा बनाया कि उसके 10 में से नौ प्रत्याशी जीत गए। दूसरी ओर पूर्व एओए अध्यक्ष अरुण मलिक सातवें स्थान पर रहे। उनके पैनल के बाकी सभी उम्मीदवारों को करारी शिकस्त मिली।

जनवरी में खत्म हुआ कार्यकाल

जनवरी में पिछली एओए कालातीत हो गई थी, लेकिन उस समय चुनाव कराने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। काफी समय तक स्थिति इसी तरह बनी रही। बाद में चुनाव कराने की कवायद शुरू हुई तो सोसायटी में इसे लेकर खींचतान शुरू हो गई। चुनाव कराने की प्रक्रिया कई बार आगे बढ़ने के बजाय रुकती रही। इस दौरान कुछ निवासियों ने पूर्व एओए अध्यक्ष अरुण मलिक पर चुनाव टलवाने के आरोप भी लगाए। इन आरोपों को निवासियों की ओर से उठाया गया था।

अधिकारी बदले, खर्च भी अटका

चुनाव कराने की प्रक्रिया के दौरान तीन चुनाव अधिकारियों को बदला गया। दूसरी ओर, चुनाव खर्च जमा कराने को लेकर भी पेच बना रहा। खर्च की व्यवस्था नहीं होने से चुनाव कई बार टलता गया। आखिरकार सोसायटी के निवासियों ने स्वयं धन एकत्र कर चुनाव खर्च उप निबंधक कार्यालय में जमा कराया। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी और रविवार को मतदान कराया जा सका। सोसायटी में कुल 630 मत थे, जिनमें से 498 निवासी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

नतीजे में बदली तस्वीर

चुनाव में आशाएं टीम, प्रगति टीम और रेजिडेंट वॉयस टीम के उम्मीदवार मैदान में थे। परिणाम में भूपेंद्रनाथ झा पहले, गौतम गहलोत दूसरे, शक्ति बजाज तीसरे, रिंकू शर्मा चौथे, अभिषेक सक्सेना पांचवें और मीनूश्री खन्ना छठे स्थान पर रहीं। पूर्व एओए अध्यक्ष अरुण मलिक सातवें स्थान पर रहे। इसके बाद विकास शर्मा, हर्ष राय और सदाशिव शर्मा क्रमश: आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर रहे। परिणाम की खास बात यह रही कि शीर्ष दस में आशाएं टीम के नौ उम्मीदवार रहे।

अब नई टीम पर निगाहें

चुनाव के दौरान सोसायटी के वित्तीय प्रबंधन, फंड की पारदर्शिता, सुरक्षा, रखरखाव और प्रशासन से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे। नई कार्यकारिणी के सामने अब इन्हीं सवालों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी। सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों और सेवा प्रदाता एजेंसियों के प्रबंधन, शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण और सोसायटी के विकास कार्यों को लेकर निवासियों की अपेक्षाएं नई एओए से जुड़ी हैं। लंबे समय से चुनाव का इंतजार कर रही सोसायटी को अब नई कार्यकारिणी से कामकाज में बदलाव की उम्मीद रहेगी।

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