राज गार्डन सिटी को अधूरे निर्माण पर जीडीए का कंपलीशन सर्टिफिकेट, एओए रजिस्ट्रेशन पर भी रार

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की राज गार्डन सिटी सोसायटी में अधूरे निर्माण के बावजूद कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया और उसी सीसी के आधार पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने सोसायटी की एओए को रजिस्टर्ड कर दिया। आरोप है कि मौके पर अभी भी काम चल रहा है, फिर भी एओए रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दे दी गई। अब डिप्टी रजिस्ट्रार के इसी फैसले को लखनऊ में चुनौती दी है।

क्या है मामला

सोसायटी की विजयी टीम ने एओए को रजिस्टर्ड करने के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन किया था। आवेदन के बाद दूसरे पक्ष ने इसे गैरकानूनी बताते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में चुनौती दी थी। आपत्ति में कहा गया था कि सोसायटी में निर्माण अभी अधूरे हैं और सीसी गलत तरीके से जारी किया गया है। इस पर सुनवाई के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार ने फैसला सुनाते हुए दूसरे पक्ष की चुनौती को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह उनकी चुनाव में हार के बाद की खीज है और दुर्भावनापूर्ण शिकायत है। इसी आधार पर सोसायटी की एओए को रजिस्टर्ड कर दिया गया और इसके आदेश जारी कर दिए गए।

फैसले पर गंभीर सवाल

डीआर के इस फैसले को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता पीयूष त्यागी ने लखनऊ में मुख्य रजिस्ट्रार के यहां शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डिप्टी रजिस्ट्रार ने सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सीसी की ही जांच नहीं की। 26 जून को बिंदुवार जवाब में सीसी, नक्शा उल्लंघन और निर्माण से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई थी, पर डिप्टी रजिस्ट्रार ने कमेटी से इसका कोई जवाब नहीं मांगा और उसकी कॉपी तक नहीं दी। पीयूष और तरुण का कहना है कि वह चुनाव का हिस्सा ही नहीं थे, उनकी आपत्ति टीम से नहीं सीसी से थी, फिर भी डिप्टी रजिस्ट्रार ने बिना जांच के और बिना दूसरा पक्ष सुने ही रजिस्ट्रेशन दे दिया, जो अधिकारों के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।

जीडीए की चुप्पी पर सवाल

पूरे मामले में जीडीए की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल है। रेजिडेंट्स का कहना है कि जो सीसी जमा किया गया है वह सितंबर 2025 में जारी होना बताया जा रहा है, जबकि जुलाई 2026 तक भी मौके पर निर्माण जारी है और कई निर्माण नक्शे के विरुद्ध हैं। इसको लेकर 22 अप्रैल को आरटीआई लगाई गई, रिमाइंडर दिए गए और फोटो सबूत भी भेजे गए, लेकिन जीडीए ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया। इसी चुप्पी को लेकर मेरठ मंडल में प्रथम अपील लगाई गई है।
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