पहला चुनाव, बड़ी उम्मीदें: निलाया ग्रीन्स में अब तय होगी सोसायटी की आवाज

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की निलाया ग्रीन्स सोसायटी में 6 सितंबर को होने वाला पहला एओए चुनाव सिर्फ पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं रहेगा। यह मतदान तय करेगा कि आने वाले समय में सोसायटी के सामूहिक मुद्दों को कौन लोग आगे रखेंगे। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य के पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं। पहली बार होने वाले चुनाव को लेकर निवासियों के बीच भी उत्सुकता बढ़ी हुई है।

कौन-कौन हैं मुकाबले में

अध्यक्ष पद के लिए दीपक कुमार और सोनू चोपड़ा आमने-सामने हैं। उपाध्यक्ष पद पर मंजीत चौहान, अरुण शर्मा और विवेक अरोड़ा के बीच मुकाबला है। सचिव पद के लिए संदीप कुमार और अश्विनी कुमार जायसवाल मैदान में हैं। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर अमित सक्सेना, हरीश हैरी और सतीश शिवहरे अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। मतदान के बाद इन पदों पर चुने जाने वाले प्रतिनिधि एओए के प्रमुख निर्णयों में अहम भूमिका निभाएंगे।

कार्यकारिणी में दस चेहरे

कार्यकारिणी सदस्य के पदों पर भी चुनावी मुकाबला कम दिलचस्प नहीं है। इसके लिए रोहित दुबे, धीरज शर्मा, नितिन मलिक, अश्विनी कुमार, मोहम्मद हासिम, जितेंद्र शर्मा, मंजू बुधलाकोटी, रेनू चौधरी, निहारिका शुक्ला और अनु कुमारी चुनाव लड़ रहे हैं। इन सदस्यों की भूमिका सोसायटी के सामूहिक मामलों को उठाने और एओए के साथ मिलकर काम करने में महत्वपूर्ण होगी।

बिल्डर के मुद्दे होंगे अहम

पहली एओए ऐसे समय जिम्मेदारी संभालेगी, जब सोसायटी में बिल्डर से जुड़े लंबित मामले चर्चा में हैं। इसके साथ ही रखरखाव, सुविधाओं और निवासियों के अधिकार से जुड़े विषय भी नई टीम के सामने रहेंगे। ऐसे में चुनाव जीतने वाले प्रतिनिधियों से उम्मीद होगी कि वे इन मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाएं और निवासियों के हित में प्रभावी तरीके से पैरवी करें।

जवाबदेही से बनेगा भरोसा

नई टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती निवासियों का भरोसा कायम करना होगी। सोसायटी के पैसों से जुड़े फैसलों, खर्च और सुविधाओं से संबंधित कार्यों में पारदर्शिता के साथ जानकारी साझा करना महत्वपूर्ण रहेगा। लंबित कामों की स्थिति और लिए गए फैसलों से निवासियों को अवगत कराने की अपेक्षा भी रहेगी। इसलिए 6 सितंबर का मतदान निलाया ग्रीन्स में केवल पहली एओए चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह तय करने का मौका भी होगा कि सोसायटी की आवाज आने वाले समय में कितनी मजबूती और जवाबदेही के साथ उठाई जाती है।
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