बिजली बिल से मेंटेनेंस वसूली पर शिकंजा, 110 सोसायटियों को UPPCL का झटका, लौटाई ऑडिट रिपोर्ट

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। बिजली बिल के जरिए मेंटेनेंस वसूली का खेल अब गाजियाबाद की सोसायटियों पर भारी पड़ता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने करीब 110 सोसायटियों की ऑडिट रिपोर्ट खारिज कर दी है। वजह यह है कि इन रिपोर्टों में बिजली बिल के साथ लिफ्ट, सिक्योरिटी, हाउसकीपिंग और अन्य मेंटेनेंस खर्च भी जोड़ दिए गए, जबकि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर चुका है। अब अगस्त में आखिरी नोटिस जारी होंगे और दिसंबर तक भी नियम नहीं मानने वाली सोसायटियों की सिंगल प्वाइंट बिजली व्यवस्था खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है।

रिपोर्ट आई, मंजूर नहीं

विद्युत निगम ने शहर की 400 से ज्यादा सोसायटियों से ऑडिट रिपोर्ट मांगी थी, ताकि यह पता चल सके कि प्रीपेड मीटर के जरिए उपभोक्ताओं से केवल बिजली का बिल लिया जा रहा है या उसके साथ दूसरे शुल्क भी वसूले जा रहे हैं। करीब एक महीने के भीतर 110 सोसायटियों ने रिपोर्ट जमा कर दी, लेकिन जांच में सामने आया कि लगभग हर रिपोर्ट में बिजली के अलावा मेंटेनेंस मदों की वसूली भी दिखाई गई। इसके बाद निगम ने एक भी रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और सभी को संशोधित रिपोर्ट दोबारा जमा करने के निर्देश दे दिए।

मीटर बना वसूली का माध्यम

निगम की जांच में पता चला कि कई सोसायटियों में प्रीपेड मीटर से बिजली बिल के साथ लिफ्ट एएमसी, डीजी सेट एएमसी, सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग, मेंटेनेंस स्टाफ और नियमित रखरखाव का खर्च भी काटा जा रहा है। जबकि आयोग पहले ही स्पष्ट आदेश दे चुका है कि बिजली मीटर का इस्तेमाल केवल बिजली शुल्क की वसूली के लिए होगा। निगम अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग सेवाओं का शुल्क लेना गलत नहीं है, लेकिन उसे बिजली बिल में जोड़ना नियमों के खिलाफ है।
प्रतीकात्मक फोटो

सोसायटियां क्यों नहीं मान रहीं?

सोसायटी प्रबंधन का तर्क है कि यदि मेंटेनेंस शुल्क बिजली बिल से अलग कर दिया गया तो बड़ी संख्या में निवासी भुगतान टाल देंगे। इससे सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट, जेनरेटर और दूसरी जरूरी सेवाओं का संचालन मुश्किल हो जाएगा। हालांकि विद्युत निगम का कहना है कि सुविधा शुल्क वसूलने का तरीका सोसायटियां तय कर सकती हैं, लेकिन बिजली मीटर को वसूली का जरिया नहीं बनाया जा सकता। आयोग का उद्देश्य बिजली बिल और मेंटेनेंस को पूरी तरह अलग रखना है।

अगस्त में आखिरी चेतावनी

अधीक्षण अभियंता अखिलेश सिंह ने बताया कि गाजियाबाद की करीब 410 सोसायटियों में से लगभग 350 अभी भी सिंगल प्वाइंट बिजली कनेक्शन पर चल रही हैं, जबकि करीब 55 सोसायटियां मल्टी प्वाइंट व्यवस्था में आ चुकी हैं। आयोग ने मार्च 2025 में पहली बार ऑडिट रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। जून 2026 में दूसरी बार नोटिस जारी हुए तो रिपोर्ट जरूर आईं, लेकिन वे नियमों के अनुरूप नहीं मिलीं। अब अगस्त में तीसरी और अंतिम नोटिस जारी की जाएगी। पहली बार 5 हजार, दूसरी बार 10 हजार और तीसरी बार 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। दिसंबर 2026 तक भी सही ऑडिट रिपोर्ट नहीं देने वाली सोसायटियों को जनवरी 2027 से चरणबद्ध तरीके से मल्टी प्वाइंट बिजली कनेक्शन में बदला जाएगा। 

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