जामिया में बीकॉम, मेवात से ब्लैकमेलिंग का धंधा! AI न्यूड वीडियो बनाकर NRI से मांगे 50 हजार डॉलर, गाजियाबाद पुलिस ने 4 को दबोचा

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। दिन में जामिया मिलिया इस्लामिया में बीकॉम की क्लास और रात में मेवात से इंटरनेशनल सेक्सटॉर्शन का नेटवर्क... गाजियाबाद क्राइम ब्रांच ने ऐसे शातिर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो फेसबुक पर लड़की बनकर फंसाता, AI से अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करता था। इस गिरोह का सूत्रधार नूंह-मेवात निवासी मोहम्मद फैसल निकला। जो जामिया मिलिया इस्लामिया जा छात्र है। कनाडा के ब्रैम्पटन निवासी NRI की शिकायत पर हुई कार्रवाई में मुजफ्फरनगर के तीन और आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। जांच में 40 शिकायतों में 6.58 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।

फर्जी आईडी का जाल

क्राइम ब्रांच प्रभारी अनिल राजपूत के मुताबिक गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी नवप्रीत कौर जैसे महिला नामों से फर्जी फेसबुक आईडी बनाते थे। मैसेंजर पर पहले दोस्ताना चैट कर विश्वास जीता जाता, फिर वीडियो कॉल की जाती। कॉल की रिकॉर्डिंग पर AI से चेहरा और आवाज जोड़कर अश्लील वीडियो तैयार कर लिया जाता। इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर डॉलर में फिरौती मांगी जाती। कनाडा निवासी पीड़ित से 50 हजार डॉलर यानी करीब 48.15 लाख रुपये की डिमांड की गई थी। रकम गाजियाबाद के आरडीसी स्थित एक बैंक खाते में मंगाई जा रही थी। दिल्ली के एक कारोबारी से तो तीन करोड़ रुपये से ज्यादा वसूलने का भी खुलासा हुआ है।

मेवात से मुजफ्फरनगर तक नेटवर्क

जांच में सामने आया कि गिरोह 2023 से सक्रिय था। मेवात में बैठे सदस्य वीडियो एडिटिंग और धमकी देने का काम संभालते थे, जबकि मुजफ्फरनगर के युवक पैसों का हिसाब-किताब देखते थे। गिरफ्तार आरोपियों में मेवात के नूंह निवासी मोहम्मद फैसल के साथ मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम सरवट निवासी मोहम्मद अमान त्यागी, मोहम्मद हम्माद त्यागी और मोहम्मद फैजान मलिक शामिल हैं। क्राइम ब्रांच प्रभारी अनिल राजपूत और एसीपी क्राइम अमित सक्सेना के मुताबिक देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों तक लोगों को निशाना बनाया गया।

खरीदे खातों में घुमाई ठगी रकम

एसीपी अमित सक्सेना ने बताया कि गिरोह अपने खातों का इस्तेमाल नहीं करता था। आरोपी 15 हजार रुपये में लोगों से बैंक खाते खरीदते थे। इन खातों की किट लेकर व्हाट्सऐप ग्रुप में डिटेल शेयर की जाती थी। ठगी की रकम पहले इन्हीं खातों में मंगाई जाती, फिर आगे ट्रांसफर कर आपस में बांट ली जाती। जिस खाते पर शिकायत ज्यादा आती, उसे बंद कर नया खाता चालू कर दिया जाता। इतना ही नहीं, रकम को शेयर मार्केट में निवेश और ट्रेडिंग में लगाकर सफेद करने की साजिश भी सामने आई है। सेक्सटॉर्शन में नाकाम होने पर आरोपी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश के नाम पर भी ठगी करते थे।

चालीस शिकायतों में करोड़ों की ठगी

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर आरोपियों के खिलाफ अब तक 40 शिकायतें मिल चुकी हैं, जिनमें 6 करोड़ 58 लाख रुपये की ठगी का आंकड़ा है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर आंकड़ा और बढ़ेगा। आरोपियों के कब्जे से पांच मोबाइल फोन, पांच बैंक अकाउंट किट, पांच सिम कार्ड और 2600 रुपये नकद बरामद हुए हैं। मोबाइलों में साइबर फ्रॉड से जुड़े अहम डिजिटल सबूत मिले हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों की पूरी चेन की जांच में जुटी है।

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