योग्यता बनाम आरक्षण पर चुप्पी तोड़ें राजनीतिक दल, देश को दें स्पष्ट जवाब: लोकेश बंसल

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। देश में आरक्षण, समान अवसर और योग्यता आधारित चयन को लेकर लगातार बहस चल रही है। बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में अब यह सवाल और भी अहम हो गया है कि क्या हर क्षेत्र में चयन का आधार योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन होना चाहिए। समाजसेवी एवं व्यापारी लोकेश बंसल ने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि देश के युवाओं और आम नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी सोच योग्यता आधारित व्यवस्था और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन को लेकर क्या है।

योग्यता को मिले प्राथमिकता

लोकेश बंसल का कहना है कि किसी भी देश की प्रगति उसकी प्रतिभा और मेहनत पर निर्भर करती है। इसलिए शिक्षा, सरकारी नौकरियों, निजी क्षेत्र, न्यायपालिका और अन्य सभी क्षेत्रों में चयन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें योग्यता, क्षमता और प्रदर्शन को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि प्रतिभाशाली युवाओं के अवसर प्रभावित न हों।

आरक्षण पर मांगा जवाब

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से तीन सीधे सवाल पूछे हैं। पहला, क्या आपकी पार्टी हर क्षेत्र में योग्यता और क्षमता को चयन का मुख्य आधार मानती है? दूसरा, वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर आपकी स्पष्ट नीति और ठोस प्रस्ताव क्या हैं? तीसरा, क्या आर्थिक और सामाजिक रूप से जरूरतमंद लोगों के लिए ऐसी प्रभावी सहायता व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को सहयोग मिले और समान अवसर भी सुरक्षित रहें?

राष्ट्रहित में हो संवाद

लोकेश बंसल का कहना है कि यह विषय किसी एक वर्ग या राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और करोड़ों युवाओं की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बयानबाजी से आगे बढ़कर इस मुद्दे पर स्पष्ट, पारदर्शी और जवाबदेह नीति देश के सामने रखनी चाहिए। उनका मानना है कि सामाजिक न्याय और योग्यता आधारित व्यवस्था के बीच संतुलित समाधान ही भारत को अधिक सक्षम, प्रतिस्पर्धी और समावेशी बना सकता है।

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