विभु मिश्रा
गाजियाबाद। अपना फ्लैट किराये पर देकर कमाई करना सामान्य बात है, लेकिन अगर यही फ्लैट रोजाना या कुछ दिनों के लिए अलग-अलग लोगों को ठहराने के लिए दिया जाने लगे तो मामला सामान्य किराये से अलग हो सकता है। गाजियाबाद के वैभव खंड स्थित विंडसर पार्क सोसायटी में स्टूडियो अपार्टमेंट को कथित तौर पर कम अवधि के लिए किराये पर दिए जाने के विरोध ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि क्या कोई फ्लैट मालिक अपनी मर्जी से आवासीय फ्लैट को Airbnb या होमस्टे के तौर पर चला सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक केवल फ्लैट का मालिक होना इसके लिए पर्याप्त नहीं है। राज्य के पर्यटन नियम, स्थानीय निकाय की शर्तें और सोसायटी के बायलॉज भी महत्वपूर्ण हैं।
विंडसर पार्क में विरोध
विंडसर पार्क सोसायटी के टावर ए और बी स्थित स्टूडियो अपार्टमेंट में बाहरी लोगों को कथित तौर पर रोजाना या कम अवधि के लिए ठहराए जाने को लेकर कुछ निवासियों ने विरोध किया। 20 सितंबर को बड़ी संख्या में निवासी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए सामने आए। उनके हाथों में ‘यह सोसायटी है, होटल नहीं’ और ‘नो एयरबीएनबी’ जैसे पोस्टर थे। निवासियों का कहना है कि लगातार नए लोगों के आने-जाने से सोसायटी का माहौल प्रभावित हो रहा है और परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
कई विभागों में शिकायत
मामले में निवासियों की ओर से जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, नगर निगम और पर्यटन विभाग को संयुक्त शिकायत दी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ फ्लैट दैनिक या अल्प अवधि के लिए बाहरी लोगों को दिए जा रहे हैं। कुछ मामलों में पुलिस सत्यापन और जरूरी पंजीकरण नहीं होने का भी दावा किया गया है। ऐसे में मामला केवल सोसायटी के निवासियों और फ्लैट मालिकों के बीच का विवाद नहीं रह जाता, बल्कि स्थानीय नियमों और पर्यटन व्यवस्था से भी जुड़ जाता है।
मालिकाना हक से छूट नहीं
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार किसी आवासीय फ्लैट का मालिक होना उसे मनमाने तरीके से Airbnb या व्यावसायिक होमस्टे में बदलने की स्वत: अनुमति नहीं देता। सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि संपत्ति के दस्तावेज, अपार्टमेंट की घोषणा, सोसायटी के बायलॉज और स्थानीय नियम उस तरह के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं या नहीं। यदि किसी आवासीय फ्लैट का इस्तेमाल बड़े स्तर पर बेड एंड ब्रेकफास्ट या दूसरी व्यावसायिक आवास सुविधा के तौर पर होने लगे तो उसके उपयोग की प्रकृति पर सवाल उठ सकता है। परिस्थितियों के अनुसार संबंधित प्राधिकरण व्यावसायिक उपयोग, जुर्माने या अन्य कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
होमस्टे और होटल अलग
विशेषज्ञों के मुताबिक हर होमस्टे को होटल नहीं माना जा सकता। वास्तविक होमस्टे आम तौर पर राज्य की पर्यटन व्यवस्था के तहत संचालित होता है और उसमें कमरे या बिस्तरों की संख्या, पंजीकरण, आवास की प्रकृति और कुछ राज्यों में मालिक के उसी परिसर में रहने जैसी शर्तें हो सकती हैं। वहीं यदि पूरा फ्लैट बार-बार अलग-अलग लोगों को एक या दो रात के लिए दिया जा रहा हो, लगातार चेक-इन और चेक-आउट हो रहे हों और होटल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हों तो इसे सामान्य आवासीय किराये से अलग गतिविधि माना जा सकता है। इसलिए फ्लैट को कुछ दिनों के लिए किराये पर देना और नियमित रूप से अल्प अवधि के मेहमानों के लिए आवास सुविधा चलाना हर स्थिति में एक जैसा नहीं है।
सोसायटी के नियम अहम
फ्लैट में Airbnb या होमस्टे चलाया जा सकता है या नहीं, यह तय करने में सोसायटी के बायलॉज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि पंजीकृत बायलॉज या संपत्ति से जुड़े दस्तावेज व्यावसायिक इस्तेमाल, पेइंग गेस्ट या कम अवधि के ठहराव पर रोक लगाते हैं तो फ्लैट मालिक केवल अपने मालिकाना हक के आधार पर गतिविधि जारी नहीं रख सकता। गुजरात हाईकोर्ट के सामने भी Airbnb के जरिये फ्लैट के हिस्से को होमस्टे के तौर पर इस्तेमाल करने का मामला आया था। अदालत ने सोसायटी की सामान्य सभा द्वारा होमस्टे और अन्य अल्प अवधि के ठहराव पर लगाए गए प्रतिबंध को महत्व दिया था। इससे यह बात सामने आती है कि सोसायटी के वैध नियमों को नजरअंदाज करके ऐसी गतिविधि चलाना कानूनी विवाद खड़ा कर सकता है।
सरकारी पंजीकरण भी जरूरी
फ्लैट को होमस्टे या बेड एंड ब्रेकफास्ट के रूप में इस्तेमाल करने से पहले संबंधित राज्य की पर्यटन नीति और स्थानीय नियमों की जांच करना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में लागू होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट व्यवस्था के तहत जहां पंजीकरण या अनुमति जरूरी हो, वहां उसे लेना मालिक की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा भवन का स्वीकृत उपयोग, अग्नि सुरक्षा, स्थानीय निकाय की आवश्यकताएं, पुलिस संबंधी नियम, कर और उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं से जुड़े अन्य प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। केवल Airbnb जैसे ऑनलाइन मंच पर फ्लैट की लिस्टिंग कर देने या वहां से बुकिंग मिलने से यह साबित नहीं होता कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं।
एक अनुमति काफी नहीं
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार राज्य की पर्यटन व्यवस्था में पंजीकरण मिलने के बाद भी सोसायटी के बायलॉज की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसी तरह सोसायटी की अनुमति होने पर भी जहां सरकारी पंजीकरण या स्थानीय मंजूरी जरूरी है, वहां उससे छूट नहीं मिलती। यानी फ्लैट मालिक को अलग-अलग स्तरों पर लागू नियमों का पालन करना पड़ सकता है। एक तरफ राज्य की पर्यटन व्यवस्था और स्थानीय निकाय की शर्तें हैं, तो दूसरी तरफ सोसायटी या अपार्टमेंट के अपने नियम। किसी एक की अनुमति दूसरे स्तर की पाबंदी को खत्म नहीं करती।
आरडब्ल्यूए क्या कर सकती है
यदि किसी सोसायटी में Airbnb या होमस्टे को लेकर शिकायत आती है तो आरडब्ल्यूए को सबसे पहले संबंधित बायलॉज देखना चाहिए और नियमों का उल्लंघन होने पर फ्लैट मालिक को लिखित नोटिस देना चाहिए। शिकायत और गतिविधि से जुड़े तथ्यात्मक साक्ष्य भी रिकॉर्ड में रखे जा सकते हैं। अगर गतिविधि से स्थानीय निकाय, पर्यटन, भवन उपयोग या अन्य नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आता है तो संबंधित विभाग से शिकायत की जा सकती है। सोसायटी के बायलॉज में अनुमति होने पर निर्धारित दंड भी लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर सोसायटी या प्रभावित निवासी सिविल कोर्ट से निषेधाज्ञा की मांग कर सकते हैं।
फ्लैट खाली नहीं करा सकती
आरडब्ल्यूए किसी मालिक को उसके अपने फ्लैट से जबरन बाहर नहीं निकाल सकती और न ही केवल प्रस्ताव पास करके उसका मालिकाना हक खत्म कर सकती है। इसी तरह अपने स्तर पर बिजली-पानी काटना या मेहमानों को जबरन रोकना भी कानूनी विवाद पैदा कर सकता है। आरडब्ल्यूए की कार्रवाई आम तौर पर सोसायटी के नियमों को लागू कराने तक सीमित रहती है। यदि मालिक नियमों का उल्लंघन जारी रखता है तो उपलब्ध कानूनी रास्ते के तहत नोटिस, निर्धारित कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर अदालत का सहारा लिया जा सकता है।
मालिक पहले ये जांचें
जो लोग अपने फ्लैट से होमस्टे या Airbnb जैसी सुविधा शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले संपत्ति के दस्तावेज और सोसायटी के पंजीकृत बायलॉज पढ़ने चाहिए। इसके बाद यह जांचना जरूरी है कि राज्य की पर्यटन नीति के तहत पंजीकरण आवश्यक है या नहीं। साथ ही भवन के स्वीकृत उपयोग, स्थानीय निकाय, अग्नि सुरक्षा, पुलिस सत्यापन और कर संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी लेनी चाहिए। वहीं किसी सोसायटी में रहने वाले लोगों को भी केवल आशंका के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय ऑनलाइन लिस्टिंग, बुकिंग, लगातार मेहमानों के आने-जाने और अन्य उपलब्ध तथ्यों का रिकॉर्ड रखना चाहिए। इसके आधार पर आरडब्ल्यूए और संबंधित विभागों के सामने लिखित शिकायत की जा सकती है।
यानी आवासीय फ्लैट को कम अवधि के लिए किराये पर देने पर देशभर में एक समान रोक नहीं है, लेकिन इसे करने का स्वत: अधिकार भी नहीं है। इसकी वैधता राज्य के पर्यटन नियमों, स्थानीय निकाय की शर्तों, भवन के स्वीकृत उपयोग और सोसायटी के लागू बायलॉज पर निर्भर करती है। विंडसर पार्क का विवाद इसी वजह से दूसरे हाउसिंग सोसायटियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि फ्लैट से किराये की कमाई और नियमित व्यावसायिक ठहराव के बीच का अंतर समझना जरूरी है।
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