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गाजियाबाद। तेजी से विकसित हो रहे राजनगर एक्सटेंशन में बढ़ते यातायात और सड़क सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को देखते हुए दुर्घटना-मुक्त क्षेत्र बनाने की पहल शुरू हुई है। राजनगर एक्सटेंशन निवासी शुमोन चटर्जी ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। अभी इस खाके को क्षेत्र की आवासीय सोसायटियों में राय और सुझाव के लिए भेजा जा रहा है। सुझाव मिलने के बाद इसे अंतिम रूप देकर जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। योजना में सड़क की खामियों से लेकर यातायात नियमों के पालन, पैदल यात्रियों की सुरक्षा, सोसायटी गेट, स्कूल क्षेत्र, आपातकालीन मदद और नागरिकों की भागीदारी तक को शामिल किया गया है।
हर सड़क की पड़ताल
योजना के पहले चरण में राजनगर एक्सटेंशन की प्रमुख सड़कों और आंतरिक संपर्क मार्गों का व्यापक सड़क सुरक्षा सर्वे कराने का प्रस्ताव है। इसमें हादसे वाले स्थान, खतरनाक मोड़ व चौराहे, खराब रोशनी, सड़क चिह्नों और संकेतकों की कमी, गड्ढे, क्षतिग्रस्त सड़क, असुरक्षित यू-टर्न, अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और जाम वाले स्थान चिन्हित किए जाएंगे। पैदल यात्रियों को व्यस्त सड़क पार करने वाली जगहों और तेज रफ्तार वाले हिस्सों की भी पहचान होगी। इसके आधार पर क्षेत्र का सड़क सुरक्षा मानचित्र तैयार किया जाएगा।
ब्लैक स्पॉट पर फोकस
हादसे की आशंका वाले स्थानों को ब्लैक स्पॉट या उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित कर वहां की समस्या के हिसाब से समाधान लागू करने का सुझाव है। कहीं यातायात गति कम करने के उपाय, कहीं उचित गति अवरोधक, चेतावनी संकेत, परावर्तक और सड़क स्टड लगाए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार स्ट्रीट लाइट, बेहतर चौराहा डिजाइन, पैदल पारपथ, लेन चिह्न और सुरक्षा अवरोधक भी लगाए जाएंगे। दृश्यता में बाधा डालने वाली चीजें हटाने और खतरनाक यू-टर्न को नियंत्रित करने पर भी जोर रहेगा।
रफ्तार पर अंकुश लगाने का सुझाव
आवासीय क्षेत्र में तेज रफ्तार को रोकने के लिए सोसायटियों, स्कूलों, बाजारों, चौराहों और पैदल पारपथों के आसपास स्पष्ट गति सीमा लागू कराने का प्रस्ताव है। महत्वपूर्ण स्थानों पर संभव होने पर कैमरों से गति निगरानी भी की जा सकती है। गलत दिशा में वाहन चलाने, खतरनाक तरीके से ओवरटेक करने, लालबत्ती तोड़ने, हेलमेट नहीं पहनने, तीन सवारी बैठाने और वाहन चलाते समय मोबाइल इस्तेमाल करने जैसे मामलों में केंद्रित कार्रवाई का सुझाव है। पैदल यात्रियों के लिए जेब्रा क्रॉसिंग, सुरक्षित रास्ते, पर्याप्त रोशनी और परावर्तक संकेतों की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है।
सोसायटी गेट यातायात प्रबंधन योजना
राजनगर एक्सटेंशन की बड़ी सोसायटियों के गेट पर सुबह-शाम बढ़ने वाले यातायात को व्यवस्थित करने के लिए सोसायटी गेट यातायात प्रबंधन योजना बनाने का प्रस्ताव है। इसमें वाहनों के प्रवेश-निकास, आगंतुक वाहन, कैब, डिलीवरी वाहन, स्कूल बस, पैदल आवाजाही और पार्किंग की व्यवस्था शामिल होगी। व्यस्त समय में जाम की स्थिति से निपटने के लिए आरडब्ल्यूए और यातायात पुलिस के बीच समन्वय का सुझाव दिया गया है। स्कूलों के आसपास सुरक्षित स्कूल क्षेत्र, गति नियंत्रण, पैदल पारपथ, स्कूल बसों की जांच और स्कूल गेट के आसपास पार्किंग नियंत्रण पर भी काम प्रस्तावित है।
हादसे में तत्काल मदद
हादसा होने की स्थिति में जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए पुलिस, यातायात पुलिस, एंबुलेंस सेवाओं, नजदीकी अस्पतालों और सोसायटियों की सुरक्षा टीमों के बीच समन्वय का प्रस्ताव है। आसपास की आपात चिकित्सा सुविधाओं की अद्यतन सूची तैयार रखी जाएगी। इसके साथ सड़क सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग व्हाट्सऐप नंबर या पोर्टल बनाने का सुझाव है। निवासी फोटो, स्थान और समस्या की जानकारी भेज सकेंगे। सड़क टूटने, स्ट्रीट लाइट खराब होने, खतरनाक पार्किंग, टूटे संकेतक, असुरक्षित सड़क पार करने की जगह, गलत दिशा में वाहन चलाने और अतिक्रमण जैसी शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति भी दर्ज की जा सकेगी।
प्रस्ताव में तीन चरणों का खाका
प्रस्ताव में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सड़क सुरक्षा समन्वय समिति बनाने की बात कही गई है। इसमें प्रशासन, यातायात पुलिस, नगर निगम, जीडीए, आरडब्ल्यूए, सोसायटियां, स्कूल, अस्पताल-एंबुलेंस सेवाएं, सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और निवासी प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। पहले 30 दिनों में सर्वे, ब्लैक स्पॉट की पहचान, रोशनी-संकेतकों में तत्काल सुधार और खतरनाक पार्किंग व यू-टर्न पर कार्रवाई का लक्ष्य रखा गया है। अगले एक से तीन महीने में सड़क, पैदल मार्ग, सोसायटी गेट और स्कूल क्षेत्र में सुधार तथा तीन से 12 महीने में कैमरा निगरानी, नियमित सुरक्षा ऑडिट और हादसों के आंकड़ों की समीक्षा का प्रस्ताव है।
हादसों की नियमित समीक्षा
योजना में हादसों, मौतों, गंभीर चोटों, सुधारे गए जोखिम वाले स्थानों, तेज रफ्तार वाले क्षेत्रों, हेलमेट और सीट बेल्ट के पालन, आपात प्रतिक्रिया समय तथा नागरिक शिकायतों के निस्तारण को नियमित समीक्षा का आधार बनाने की बात कही गई है। जागरूकता अभियान में “धीरे चलें, हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं, वाहन चलाते समय मोबाइल न चलाएं और पैदल यात्रियों का सम्मान करें” जैसे संदेश प्रमुख होंगे। शुमोन चटर्जी के मुताबिक, सोसायटियों से मिलने वाले सुझावों के आधार पर अंतिम खाका तैयार किया जाएगा, ताकि प्रशासन के सामने क्षेत्र की सड़क सुरक्षा को लेकर एक व्यापक और व्यावहारिक योजना रखी जा सके।
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