इस दोस्ती को क्या नाम दूं, कचहरी में वकील और बंदर की दोस्ती बनी मिसाल

अपने बंदर दोस्त का स्वागत करते महेश यादव
विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। कचहरी में रोजाना मुकदमों की बहस, तारीखों की भागदौड़ और वकीलों-मुवक्किलों की आवाजाही के बीच एक ऐसी दोस्ती भी है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह दोस्ती किसी इंसान से नहीं, बल्कि एक बंदर से है। पिछले करीब पांच वर्षों से बंदर रोज अपने खास दोस्त के चेंबर में पहुंचता है और वहां से रोटी लेकर ही लौटता है। दोनों की मुलाकात और अपनापन दिखाने वाला वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

रोज रोटी का इंतजार

जिला अदालत में करीब 30 वर्षों से वकालत कर रहे अधिवक्ता महेश यादव के लिए यह बंदर अब कचहरी की भीड़ में एक जाना-पहचाना चेहरा बन चुका है। महेश यादव पूर्व में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भी रह चुके हैं। रोज जब वह कचहरी स्थित अपने चेंबर में बैठते हैं, कुछ देर बाद उनका यह खास मेहमान भी पहुंच जाता है। कभी वह चुपचाप सामने बैठकर रोटी का इंतजार करता है तो कभी सीधे मेज पर आकर बैठ जाता है।
रोटी के लिए वकील साहब की तलाशी लेता बंदर

जेब तक पहुंच जाता है

दोनों के बीच बढ़े इस अपनत्व के किस्से भी कम दिलचस्प नहीं हैं। रोटी मिलने में देर हो तो बंदर कभी महेश यादव की जेब तक टटोलने लगता है, मानो उसे अच्छी तरह पता हो कि उसका हिस्सा कहां रखा है। महेश यादव भी उसे देखकर नाराज होने के बजाय प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हैं और रोटी खिला देते हैं। रोटी मिलते ही बंदर उसे लेकर चेंबर से निकल जाता है। कचहरी में मौजूद लोग इस अनोखे नजारे को देखकर अक्सर मुस्कुराए बिना नहीं रह पाते।

पांच साल से रिश्ता कायम

महेश यादव बताते हैं कि यह सिलसिला करीब पांच वर्षों से चला आ रहा है। जिस दिन वह किसी वजह से कचहरी नहीं पहुंचते, बंदर उनके चेंबर के आसपास दिखाई देता है। अगले दिन महेश यादव के पहुंचते ही वह फिर उनके पास आ जाता है। इंसान और जानवर के बीच भरोसे और अपनापन दिखाने वाला यह रिश्ता अब कचहरी आने वाले लोगों के लिए भी कौतूहल का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दोनों की यही दोस्ती लोगों को खूब पसंद आ रही है।
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