गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन में स्ट्रीट डॉग्स का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि अब यह विवाद सीधे पुलिस थाने तक पहुंचने लगा है। ताजा मामला यहां की मशहूर सोसाइटी 'ऑफिसर्स सिटी II' का है, जहां लगातार बढ़ती कुत्तों की संख्या और उनके हमलों से तंग आकर महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। सोसाइटी की महिलाओं की ओर से थाना नंदग्राम में एक लिखित शिकायत दी गई है, जिसमें बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा पर मंडराते खतरे को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक
सोसाइटी की महिलाओं द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि परिसर के अंदर आवारा कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन भयावह रूप लेता जा रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि छोटे बच्चों का पार्क में खेलना और बुजुर्गों का सुबह-शाम टहलना पूरी तरह से दूभर हो चुका है। आए दिन कुत्ते मासूम बच्चों और बुजुर्गों के पीछे दौड़ पड़ते हैं और उन्हें काटकर घायल कर देते हैं। हर वक्त हादसों का डर बना रहता है। यहां तक कि टावरों में ऊपरी मंजिल तक ये कुत्ते फ्लैटों के बाहर बैठे रहते हैं, जिसके कारण निवासी अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं और लोगों का शांति से रहना मुश्किल हो गया है।
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| सोसायटी में अवारा कुत्तों का कब्जा |
एओए और मेंटेनेंस एजेंसी पर आरोप
शिकायती पत्र में निवासियों ने इस बदहाल स्थिति के लिए सीधे तौर पर सोसाइटी की एओए और मेंटेनेंस एजेंसी को कसूरवार ठहराया है। महिलाओं का आरोप है कि मेंटेनेंस मैनेजर राहुल माहेश्वरी, ऋतु और सिक्योरिटी सुपरवाइजर की मिलीभगत व लापरवाही की वजह से बाहर के आवारा कुत्ते खुलेआम सोसाइटी के मुख्य गेटों से अंदर दाखिल हो जाते हैं। जब निवासी इस लापरवाही का विरोध करते हैं और सुरक्षा पर सवाल उठाते हैं, तो मेंटेनेंस टीम साफ तौर पर हाथ खड़े कर देती है। पत्र में आरोप है कि एओए और मेंटेनेंस प्रबंधन निवासियों को सुरक्षा देने के बजाय कुछ पशु प्रेमियों का पक्ष लेकर मामले को बढ़ावा दे रहे हैं।
सख्त कार्रवाई की मांग
सोसाइटी की महिलाओं ने थाना नंदग्राम पुलिस से³ गुहार लगाई है कि मेंटेनेंस मैनेजर और एओए पदाधिकारियों को तुरंत थाने बुलाकर पूछताछ की जाए और उनकी जवाबदेही तय करते हुए कानूनी कार्रवाई की जाए। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का मुद्दा उठाते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि सोसायटी के रेजिडेंट्स की इन स्ट्रीट डॉग्स से सुरक्षा को लेकर जल्द ही कोई ठोस और समयबद्ध कदम नहीं उठाया गया, तो निवासी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, जिलाधिकारी गाजियाबाद और अन्य उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराएंगे।
ये हैं शिकायतकर्ता
इस शिकायत पत्र को सौंपने और इस मुहिम में शामिल रहने वाली निवासियों में मुख्य रूप से निहारिका, रुचिका, आकांक्षा, पारुल, अंजलि, शिवानी, दिव्या, एम. मंजू, आभा, कविता, रूबी, कीर्ति, चारु त्यागी, नेहा, बबीता, तनुजा और वर्शिता शामिल हैं।
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