देविका स्काइपर्स सोसायटी के 10 टावरों की बदलेगी सूरत, 56 लाख से शुरू हुआ मरम्मत और पेंटिंग का काम

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। सालों से मरम्मत और रंग-रोगन की जरूरत महसूस कर रही राजनगर एक्सटेंशन की देविका स्काइपर्स सोसायटी की इमारतों की सूरत बदलने की कवायद शुरू हो गई है। प्रथम नवरात्र के अवसर पर 11 अक्टूबर को पूजा-अर्चना के साथ रिपेयर और पेंटिंग कार्य का शुभारंभ किया गया। करीब 56 लाख रुपये की लागत से पहले चरण में पांच टावरों की मरम्मत कराई जाएगी। एओए ने सभी 10 टावरों में चरणबद्ध तरीके से काम पूरा कराने की योजना बनाई है। पूरी परियोजना का लक्ष्य करीब एक वर्ष में पूरा करना है।

56 लाख से पहले पांच टावर

एओए के संयुक्त सचिव मनोज पवार ने बताया कि करीब 13-14 वर्ष पुरानी सोसायटी की इमारतों में मरम्मत और पेंटिंग की जरूरत लंबे समय से बनी हुई थी। अब एओए ने निवासियों के सहयोग से इस काम की शुरुआत की है। पहले चरण में टावर-1 से टावर-5 तक मरम्मत और रंग-रोगन कराया जाएगा। इस पर करीब 56 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना की कुल लागत में 75 प्रतिशत राशि निवासियों के योगदान और 25 प्रतिशत एओए फंड से दी जाएगी। प्रत्येक फ्लैट से 11 हजार रुपये की पहली और सात हजार रुपये की दूसरी किस्त ली जाएगी।

छह से आठ महीने में होगा काम

उन्होंने बताया कि पहले चरण के पांच टावरों में रिपेयर और पेंटिंग का काम छह से आठ महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद दीपावली के बाद टावर-6 से टावर-10 तक काम शुरू करने की योजना है। इस तरह पूरी सोसायटी के सभी 10 टावरों को मरम्मत और रंग-रोगन के दायरे में लाया जाएगा। एओए का जोर केवल इमारतों का बाहरी स्वरूप सुधारने पर नहीं, बल्कि उनकी मरम्मत और रखरखाव के जरिए सुरक्षा व मजबूती बेहतर करने पर भी है। नवरात्र में शुरू हुई यह पहल सोसायटी के रखरखाव की दिशा में अहम कदम है।

मेंटेनेंस से विकास तक पहल

एओए अध्यक्ष अजय सैनी के अनुसार जनवरी 2026 में जीडीए से अनापत्ति पत्र मिलने के बाद नियमित मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभाली गई थी, ताकि निवासियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी न हो। इसके बाद पार्कों, झूलों, खेल सुविधाओं, क्लब, स्विमिंग पूल, बेसमेंट की सफाई, सीसीटीवी कैमरों, सुरक्षा व्यवस्था, लाइटिंग, लिफ्टों के वार्षिक रखरखाव और अग्निशमन उपकरणों की मरम्मत समेत कई काम कराए गए। सोसायटी में विधायक निधि से ओपन जिम और सोलर पोल भी लगवाया गया है। हालांकि, बिल्डर से सोसायटी का पूर्ण हैंडओवर अब तक नहीं हुआ है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में एओए निवासियों के सहयोग से उपलब्ध संसाधनों के बीच सुविधाओं में सुधार और इमारतों के रखरखाव का काम आगे बढ़ा रही है।
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