नई दिल्ली। सोचिए, कल सुबह आपकी आँख खुले और आप हमेशा की तरह अपना फोन उठाएं, लेकिन वॉट्सऐप पर टैप करते ही स्क्रीन पर एक लाल रंग का मैसेज चमके-"आगे बढ़ने के लिए अपना क्रेडिट कार्ड विवरण दर्ज करें"! इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम पर पसंदीदा रील्स का पन्ना खोलने या फेसबुक पर दोस्तों की तस्वीरें देखने से पहले आपकी स्क्रीन पर महीने का सब्सक्रिप्शन प्लान दिखाई देने लगे।
एक पल के लिए सोचकर ही किसी भी स्मार्टफोन यूज़र के पसीने छूट सकते हैं। बीते कुछ दिनों से इंटरनेट की दुनिया में इसी भयावह मंज़र की एक खबर आग की तरह फैल रही है कि मार्क जुकरबर्ग की कंपनी 'मेटा' अब मुफ़्त की खैरात बांटना पूरी तरह बंद करने जा रही है और देश के हर यूज़र को सोशल मीडिया चलाने का मोटा किराया चुकाना होगा।
खबर इतनी सनसनीखेज है कि करोड़ों यूज़र्स में हड़कंप मच गया है। लेकिन ठहरिए! क्या वाकई आपकी डिजिटल लाइफ पर ताला लगने वाला है या फिर यह इंटरनेट पर बुना गया अब तक का सबसे बड़ा और चतुर भ्रम है? जब इस सस्पेंस की परतें उघेड़ी गईं, तो जो सच सामने आया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया।
दरअसल, यह पूरा बवंडर आधी-अधूरी जानकारी को मिर्च-मसाला लगाकर परोसने का नतीजा है। सीधी और साफ बात यह है कि आपके फोन में पड़े वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक का मुफ़्त सफर खत्म नहीं हुआ है। आप कल भी, परसों भी और सालों-साल तक अपनों को बिना एक भी रुपया दिए वैसे ही मैसेज भेज सकेंगे, घंटों रील्स स्क्रॉल कर सकेंगे और वॉयस या वीडियो कॉल का आनंद ले सकेंगे।
तो फिर अचानक इस 'किराए' और 'चार्ज' की बात ने इतना तूल कैसे पकड़ा? इसके पीछे छिपी है मेटा की एक ऐसी चालाक रणनीति, जिसे लोग सोशल मीडिया का अंत समझ बैठे। कंपनी दरअसल आम यूज़र्स से नहीं, बल्कि उन लोगों की जेब से पैसे निकाल रही है जो इंटरनेट पर खास और वीआईपी दिखना चाहते हैं। अगर आपको अपने नाम के आगे चमचमाता हुआ 'ब्लू टिक' यानी वेरिफिकेशन बैज चाहिए, अपने अकाउंट के लिए बुलेटप्रूफ सिक्योरिटी चाहिए या सीधे कंपनी से कस्टमर सपोर्ट की सुविधा चाहिए, तो ही आपको अपनी जेब ढीली करनी होगी।
इसके अलावा, व्हाट्सऐप अपनी उन बड़ी कंपनियों, बैंकों और ब्रांड्स से पैसे वसूलता है जो आपको दिन-रात प्रमोशनल मैसेज और बिल भेजते हैं। इसी 'बिजनेस चार्ज' और 'वीआईपी ब्लू टिक' की खबर को कुछ लोगों ने ऐसा घुमाया कि मानो अब हर आम नागरिक की जेब पर डाका पड़ने वाला है।
अगर आप इस वीआईपी क्लब का हिस्सा बनना चाहते हैं और अपनी प्रोफाइल पर ब्लू टिक चमकाना चाहते हैं, तब तो आपकी जेब से हर महीने करीब 79 रुपये से लेकर 699 रुपये तक का खर्च निकलेगा। लेकिन अगर आप हमारी और आपकी तरह सिर्फ मनोरंजन और अपनों से जुड़ने के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपका खर्चा आज भी 'शून्य' ही रहने वाला है।
भारत में इस अफवाह का इतना भयानक असर इसलिए हुआ क्योंकि देश में मेटा का साम्राज्य किसी छोटे-मोटे देश की आबादी से भी कई गुना बड़ा है। आज भारत में अकेले व्हाट्सऐप के करीब 55 करोड़, इंस्टाग्राम के 55 करोड़ और फेसबुक के 70 करोड़ से भी ज्यादा एक्टिव यूज़र्स हैं। ज़ाहिर है कि अगर इतने बड़े बाज़ार पर ₹1 का भी चार्ज लगता, तो हाहाकार मच जाता। लेकिन फिलहाल आप राहत की सांस ले सकते हैं-आपके फोन का यह डिजिटल मेला पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ़्त और गुलज़ार रहने वाला है!
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