इंदिरापुरम: डीजे के शोर से रातभर कांपती हैं खिड़कियां, बच्चों और बुजुर्गों की नींद हराम

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। इंदिरापुरम और एनएच-9/24 के आसपास स्थित हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोगों के लिए तेज आवाज में बजने वाले डीजे परेशानी का सबब बन गए हैं। खोड़ा मंदिर से शुरू होकर लाल कुआं और मेरठ तक जाने वाले डीजे वाहनों के काफिलों से निकलने वाला तेज शोर रिहायशी इलाकों की शांति भंग कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई बार डीजे की तेज आवाज से घरों की खिड़कियां तक हिलने लगती हैं। बच्चों की नींद टूटती है तो बुजुर्गों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद इस समस्या पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।

रात की शांति पर भारी डीजे का शोर

निवासियों के मुताबिक, दर्जनों ट्रक और टेंपो पर लदे डीजे तेज आवाज में संगीत बजाते हुए रिहायशी क्षेत्रों के आसपास से गुजरते हैं। इन वाहनों से निकलने वाली धमक इतनी तेज होती है कि घरों के भीतर तक कंपन महसूस होता है। देर रात तक जारी रहने वाला शोर लोगों के आराम और नींद में खलल डालता है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और उन लोगों को होती है जिन्हें शांत वातावरण की जरूरत होती है।

खोड़ा मंदिर से दूर तक काफिले

स्थानीय लोगों का कहना है कि खोड़ा मंदिर के आसपास से शुरू होने वाले ऐसे जुलूस और डीजे वाहनों के काफिले लाल कुआं और मेरठ की ओर तक जाते हैं। रास्ते में पड़ने वाली आवासीय सोसायटियों के लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। निवासियों के अनुसार, यह समस्या किसी एक गली या सोसायटी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के कई रिहायशी इलाकों को प्रभावित कर रही है।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

लोगों का आरोप है कि तेज आवाज में डीजे बजाने वाले वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौसले बढ़ रहे हैं। निवासियों ने स्थानीय पुलिस से मांग की है कि ऐसे वाहनों के संचालकों और आयोजकों को ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन करने के लिए सख्ती से निर्देशित किया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि रिहायशी क्षेत्रों में लोगों को राहत मिल सके।

नियमों का पालन कराने की मांग

निवासियों ने ध्वनि प्रदूषण पर निर्धारित मानकों का हवाला देते हुए प्रशासन और पुलिस से इस समस्या को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि केवल शिकायतों का इंतजार करने के बजाय पुलिस को ऐसे आयोजनों और डीजे वाहनों पर निगरानी रखनी चाहिए। लोगों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान भी दूसरों की शांति, स्वास्थ्य और नींद का ध्यान रखना जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो रिहायशी इलाकों में तेज डीजे का शोर लोगों के लिए लगातार परेशानी बना रहेगा।
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