कैंसर ने जिंदगी की रफ्तार रोकी, हौसला नहीं; सौरभ की ‘The World Tilted - A True Human Story' सिखाती है फिर से जीने का हुनर

विभु मिश्रा 
गाजियाबाद। जिंदगी कभी एक खबर से बदल जाती है। नवंबर 2019 में सौरभ त्यागी को जब कैंसर का पता चला तो उनके सामने भी जिंदगी का ऐसा ही मोड़ था। बीमारी के बाद तीन बड़ी सर्जरी, रेडियोथेरेपी और लंबी रिकवरी का दौर आया। शरीर ने मुश्किलें झेलीं, दिनचर्या बदली और जिंदगी की प्राथमिकताएं भी बदल गईं, लेकिन सौरभ ने हिम्मत नहीं छोड़ी। राजनगर एक्सटेंशन निवासी सौरभ ने इसी संघर्ष को अपनी किताब The World Tilted: A True Human Story में अनुभव कथा के रूप में दर्ज किया है। किताब पढ़ते हुए महसूस होता है कि यह कैंसर से लड़ाई की कहानी से ज्यादा उस हौसले की कहानी है, जो मुश्किल वक्त में इंसान को दोबारा खड़ा करता है।

मीडिया और मार्केटिंग क्षेत्र में करीब दो दशक का पेशेवर अनुभव रखने वाले सौरभ अपना न्यूज ब्लॉग भी चलाते हैं। बीमारी से पहले उनकी जिंदगी काम और पेशेवर जिम्मेदारियों की रफ्तार में चल रही थी। कैंसर ने अचानक उस रफ्तार पर ब्रेक लगाया, लेकिन सौरभ के लिए यह ठहराव अंत नहीं बना। इलाज के साथ उन्होंने अपनी जिंदगी, रिश्तों और खुद की पहचान को नए सिरे से समझना शुरू किया। किताब में इसी बदलाव को ईमानदारी के साथ सामने रखा गया है।

एक खबर ने बदली जिंदगी

अपनी अनुभव कथा में लेखक सौरभ त्यागी ने बताया है कि कैंसर का पता चलना उनके लिए सिर्फ बीमारी की शुरुआत नहीं थी। इसके साथ शरीर में बदलाव, आवाज, आत्मविश्वास और पेशेवर पहचान को लेकर कई सवाल भी सामने आए। तीन बड़ी सर्जरी और रेडियोथेरेपी से गुजरना आसान नहीं था। लंबे समय तक चली रिकवरी ने सामान्य जिंदगी में लौटने की प्रक्रिया को भी धीमा किया।

किताब की खूबी यह है कि लेखक बीमारी को केवल चिकित्सकीय घटनाओं के रूप में नहीं गिनाते। वह बताते हैं कि गंभीर बीमारी इंसान की सोच को किस तरह बदल देती है। जो जिंदगी पहले काम और रोजमर्रा की भागदौड़ में आगे बढ़ रही थी, उसमें अचानक स्वास्थ्य सबसे बड़ा सवाल बन जाता है। इसी बदलाव से गुजरते हुए सौरभ ने यह समझने की कोशिश की कि बीमारी के बाद जिंदगी को किस तरह फिर से अपनाया जाए।

मुश्किल वक्त के रिश्तों की परख

किताब का एक प्रभावशाली हिस्सा उन रिश्तों से जुड़ा है, जिन्हें बीमारी ने एक अलग नजर से दिखाया। किताब के मुताबिक मुश्किल समय में यह समझ आता है कि कौन सिर्फ सामान्य परिस्थितियों का साथी है और कौन सच में साथ निभाने वाला है।

किसने हाल पूछा, किसने मिलने की कोशिश की, कौन बिना किसी अपेक्षा के साथ खड़ा रहा और कौन धीरे-धीरे दूर हो गया, सौरभ ने इन अनुभवों को अपनी कहानी में जगह दी है। लेखक ने रिश्तों में जरूरत और अपनत्व के बीच के अंतर को भी महसूस किया। यह हिस्सा किताब को खास बनाता है, क्योंकि यहां बात सिर्फ लेखक के अनुभव की नहीं रह जाती। पाठक भी अपने रिश्तों को लेकर सोचने लगता है।

आस्था से मिला संबल

सौरभ की जिंदगी में आस्था का जुड़ाव बीमारी से पहले का है। वर्ष 2011 में परिवार के एक सदस्य के कठिन समय के दौरान राम दास की पुस्तक Miracle of Love के माध्यम से उन्हें नीम करोली बाबा के बारे में जानने का अवसर मिला। जनवरी 2016 में पहली बार कैंची धाम की यात्रा के बाद महाराज जी के प्रति उनका विश्वास उनकी निजी जिंदगी का हिस्सा बन गया।

लेखक के अनुसार बीमारी के दौरान यही आस्था उनके लिए और महत्वपूर्ण हुई। 2022 में एक ऑपरेशन के दौरान आई जटिलता के बीच महाराज जी को याद कर की गई प्रार्थना का प्रसंग किताब में खास जगह रखता है। सौरभ इसे चमत्कार साबित करने के लिए नहीं लिखते। वह इसे अपने अनुभव और विश्वास के रूप में रखते हैं। यही वजह है कि पाठक पर किसी निष्कर्ष का दबाव नहीं बनता।

कैंची धाम का अनोखा प्रसंग

किताब में 2026 की कैंची धाम यात्रा का प्रसंग भी पाठक का ध्यान खींचता है। बीमारी के बाद पहली बार परिवार के साथ वहां पहुंचे सौरभ लंबी कतार में थे। इसी दौरान एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने उनकी मदद की और परिवार को आगे बढ़ने में सहायता की।

किताब के लेखक के मुताबिक बाद में उस पुलिसकर्मी को तलाशने की कोशिश की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। सौरभ के लिए यह घटना महज एक मुलाकात नहीं रही। इसे संयोग माना जाए या आस्था से जुड़ा अनुभव, किताब कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं देती। लेखक ने घटना को उसी रूप में रखा है, जैसा उन्होंने अनुभव किया।

दूसरी जिंदगी की सीख

किताब के उपशीर्षक 'A Memoir of Cancer, Faith and a Second Life' में  ‘दूसरी जिंदगी’ की बात है और यही इसकी मूल भावना भी है। लेखक के मुताबिक बीमारी से बाहर निकलना केवल इलाज पूरा होने का नाम नहीं है। असली चुनौती सामान्य जिंदगी में लौटने, काम से फिर जुड़ने, रिश्तों को समझने और भविष्य के बारे में नए सिरे से सोचने की होती है।

सौरभ की कहानी बताती है कि जिंदगी संकट के बाद पहले जैसी न भी रहे तो उसे फिर से खूबसूरत बनाया जा सकता है। कई बार बीमारी इंसान से बहुत कुछ छीनती है, लेकिन उसी दौर में वह जिंदगी की उन चीजों की कीमत भी समझाता है, जिन्हें सामान्य दिनों में नजरअंदाज कर दिया जाता है।

हार मानना विकल्प नहीं

किताब की सबसे बड़ी ताकत इसका प्रेरक संदेश है। सौरभ ने कैंसर को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। बीमारी ने उनके जीवन की गति जरूर बदली, लेकिन आगे बढ़ने की इच्छा को खत्म नहीं किया। इलाज और रिकवरी के कठिन दौर के बाद भी उन्होंने काम और लेखन से अपना जुड़ाव बनाए रखा।

किताब के लेखक के अनुसार जिंदगी की दूसरी पारी का अर्थ सिर्फ स्वस्थ होकर लौटना नहीं, बल्कि अपने जीवन को नए नजरिए से देखना है। इसी वजह से यह किताब केवल कैंसर से गुजर चुके लोगों के लिए नहीं है। यह उन सभी के लिए प्रासंगिक है, जिनकी जिंदगी कभी बीमारी, निजी संकट या किसी बड़े बदलाव से अचानक बदल गई हो।

कुल मिलाकर The World Tilted: A True Human Story बीमारी के दर्द से शुरू होकर उम्मीद तक पहुंचने वाली अनुभव कथा है। इसमें इलाज की कठिनाइयां हैं तो रिश्तों की सच्चाई भी, आस्था के अनुभव हैं तो खुद को दोबारा खोजने की कोशिश भी। सौरभ त्यागी ने अपनी जिंदगी के कठिन अध्याय को किताब में बदलकर यह संदेश दिया है कि मुश्किल वक्त जिंदगी की रफ्तार जरूर रोक सकता है, लेकिन अगर हौसला कायम रहे तो सफर दोबारा शुरू किया जा सकता है। किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म किंडल पर उपलब्ध है। 

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